कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ( COPA-Computer Operator and Programming Assistant)
आईटीआई परिचय
आईटीआई यानी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (Industrial Training Institute), एक ऐसा संस्थान है जहां अलग-अलग तरह के ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाता है. आईटीआई कोर्स करने के बाद, सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के सेक्टर में नौकरी मिल सकती है ।
आईटीआई से जुड़ी कुछ और बातें: – आईटीआई प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद, राज्य और केंद्र सरकार की नौकरी मिल सकती है । आईटीआई में कोर्स करने के लिए, 10वीं के बाद इंजीनियरिंग या गैर-इंजीनियरिंग कोर्स का चुनाव किया जा सकता है । इंजीनियरिंग में – इलेक्ट्रीशियन , इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक , मैकेनिक मोटर व्हीकल , डीजल मैकनिक ,फिटर , वेल्डर, टर्नर, मशीनिष्ट ट्रेड होते हैं । नॉन-इंजीनियरिंग में कोपा, स्टेनोग्राफी हिंदी/अंग्रेजी , स्विंग टेक्नोलॉजी जैसे कई ट्रेड होते हैं ।
व्यवसाय परिचय (Trade Introduction)
यह कम्प्युटर साइंस से सम्बंधित व्यवसाय (Trade) है । कोपा (COPA) का फुल फॉर्म कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (Computer Operator and Programming Assistant) है । यह एकवर्षीय पाठ्यक्रम है, जो कि 10वीं कक्षा के बाद छात्रों को कम्प्यूटर के क्षेत्र में कैरियर बनाने में सहायता करता है। यह कोपा (COPA) व्यवसाय, क्राफ्ट्समेन ट्रेनिंग स्कीम (CTS) के अंतर्गत प्रशिक्षण महानिदेशालय ( Directorate General of Training-DGT) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship – MSDE) के द्वारा संचालित है, इस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु छात्रों को 10+2 पैटर्न की 10 वी कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए।
कोपा सर्टिफिकेट
COPA पाठ्यक्रम सैद्धांतिक ज्ञान (Trade Theory) एवं व्यवहारिक कौशल (Trade Practical) के साथ ही रोजगार योग्यता कौशल (Employability Skills) प्रदान करता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम पास करने के बाद प्रशिक्षु (Trainee) को NCVT (National Council for Vocational Training) द्वारा नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट (NTC) and SCVT (State Council for Vocational Training) द्वारा स्टेट ट्रेड सर्टिफिकेट (STC) दिया जाता है। यह प्रमाणपत्र राष्ट्रीय स्तर पर मान्य होता है ।
संशोधित उत्तीर्ण अंक

कोपा पाठ्यक्रम विवरण
कम्प्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (COPA) पाठ्यक्रम आपको कम्प्यूटर फंडामेंटल, बेसिक कम्प्यूटर हार्डवेयर, कंप्यूटर और अन्य संबंधित उपकरणों के रखरखाव, माइक्रोसॉफ्ट एम.एस. वर्ड , एम.एस. एक्सेल , प्रेजेंटेशन , डेटाबेस मैनेजमेंट, कंप्यूटर नेटवर्किंग, इंटरनेट एवं वेब डिजाईन एचटीएमएल, जावास्क्रिप्ट प्रोग्रामिंग, एडवांस एम.एस. एक्सेल , ई कॉमर्स, साइबर सिक्युरिटी, पाइथन/जावा प्रोग्रामिंग में कौशल विकास हेतु उपयोगी है।
उच्च शिक्षा के अवसर
आईटीआई कम्प्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (ITI COPA) ट्रेड उत्तीर्ण करने के पश्चात उच्व शिक्षा हेतु पॉलिटेक्निक कॉलेज में सम्बन्धित इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में लेटरल एंट्री के तहत द्वितीय वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं।
कोपा के बाद प्रशिक्षण अधिकारी/इंस्ट्रक्टर कैसे बने ?
आईटीआई कम्प्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (ITI COPA) ट्रेड उत्तीर्ण करने के पश्वात आईटीआई कम्प्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (ITI COPA) ट्रेड में शिल्प प्रशिक्षक प्रशिक्षण योजना (Craftsmen Instructor Training Scheme – CITS) पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं। CITS पूर्ण होने के पश्चात प्रतियोगी परीक्षा पास करने के उपरांत आप प्रशिक्षण अधिकारी/इंस्ट्रक्टर (Training Officer/Instructor) बन सकते है ।
रोजगार विकल्प
1- आईटीआई COPA ट्रेड में प्रशिक्षण अधिकारी / इंस्ट्रक्टर (Training Officer/Instructor for ITI COPA)
2- सॉफ्टवेयर कंपनियों में सहायक प्रोग्रामर (Assistant Programmer)
3- कार्यालयों/ संस्थानों में कंप्यूटर ऑपरेटर (Computer Operator)
4- कम्प्यूटर संस्थानों या स्कूलों में लैब सहायक (Lab Assistant)
5- हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर कंपनियों में तकनीशियन (Computer Technician)
6- प्रिंटिंग / पब्लिकेशन में डीटीपी ऑपरेटर (DTP Operator)
7- स्व-रोजगार (साइबर कैफे/डीटीपी केंद्र/कंप्यूटर शॉप / डाटा प्रोसेसिंग)
अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण (Apprenticeship Training)
कम्प्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (COPA) ट्रेड में राष्ट्रीय शिक्षता प्रमाणपत्र (National Apprentice Certificate) के लिए अग्रणी उद्योगों/संगठनों में अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण (Apprenticeship Training) प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण रेलवे भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, शासकीय कार्यालयों एवं अन्य सार्वजानिक उपक्रमों में प्राप्त किया जा सकता है। इस हेतु अप्रेंटिस पोर्टल (https://www.apprenticeshipindia.gov.in) पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
आईटीआई में प्रवेश
कौशल विकास संचालनालय, मध्यप्रदेश द्वारा आईटीआई में सत्र 2024 के प्रवेश हेतु नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। वर्ष 2024-25 हेतु आईटीआई में प्रवेश डी एस डी पोर्टल (https://www.dsd.mp.gov.in) से ऑनलाइन काउन्सलिंग के अंतर्गत किए जाएंगे। आईटीआई में प्रवेश हेतु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 01 मई 2024 से प्रारंभ हो गए हैं। आईटीआई में प्रवेश हेतु विभित्र कोर्स एवं अर्हता की जानकारी उपर दी गई लिंक से प्राप्त की जा सकती है।
आईटीआई से सम्बंधित महत्वपूर्ण फुल फॉर्म –
ATI – Advanced Training Institute (For Instructor)
CITS – Craftsmen Instructor Training Scheme
CTI – Central Training Institute (For Instructor)
DGT – Directorate General of Training
ITI – Industrial Training Institute
MSDE – Ministry of Skill Development and Entrepreneurship
NAC – National Apprenticeship Certificate
NCVT – National Council for Vocational Training
NTC – National Trade Certificate
RPL – Recognition of Prior leaming
SCVT – State Council for Vocational Training
STC – State Trade Certificate
आग लगने के कारण –
ज्वलनशील पदार्थ के जलने को आग कहते है। न चाहे गये स्थान पर तथा न चाहे गये मौको पर तथा अनियंत्रित मात्रा में आग संपत्ति तथा सामान को क्षति या नष्ट कर सकती है। यह व्यक्ति को हानि पहुँचा सकती है।आग की दुर्घटनाएं ज्वलनशील द्रवों, दोषपूर्ण विद्युत् और गैस लीकेज आदि अनेक कारणों से होती है। आग लगने के लिए ईंधन, ज्वलन और ऑक्सीजन तीन कारक अनिवार्य हैं । कारखानों में आग लगने के कारण निम्न कारण है –
1 – विद्युतीय तारों का ढीला होना
2 – विद्युतीय तारों पर अधिक लोड होना
3 – बिजली के शॉर्ट सर्किट से
4 – कारखानों में धूम्रपान करने से
5 – तेज चलने वाली मशीनों में तेल का न होना
6 – ज्वलनशील पदार्थों का ध्यान न रखने से
अग्नि तत्व (Element of fire)
आग लगाने के लिए तीन आवश्यक तत्वों (ईंधन, तापमान, ऑक्सीजन) का होना आवश्यक है , किसी भी एक की अनुपस्थिति में आग नहीं लगेगी।

आग लगने के प्रकार
ईंधन की प्रकृति के आधार पर आग को चार प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है –
क्लास-ए आग (CLASS ‘A’ FIRE)
ठोस पदार्थो जैसे – लकड़ी, कागज, कपडा आदि में लगने वाली आग क्लास-ए आग कहलाती है। इस तरह की आग बुझाने के लिए पानी की फुहार द्वारा आग के निचले हिस्से में दें तथा धीरे-धीरे ऊपर लाएं। पानी से भरे अग्निशामक यंत्र का उपयोग इस प्रकार की आग पर किया जाता है।
क्लास-बी आग (CLASS ‘B’ FIRE)
द्रव पदार्थो जैसे ग्रीस, गैसोलीन, तेल आदि में लगने वाली आग क्लास-बी आग कहलाती है। इस तरह की आग बुझाने के लिए फोम या रेत इत्यादि से ढककर आक्सीजन की सप्लाई को आग से अलग करना चाहिए। पानी का उपयोग जलते हुए द्रव्य पर कभी न करें। फोम, सूखा पाऊडर या CO2 प्रकार के अग्निशामक यंत्र का उपयोग इस प्रकार की आग पर किया जाता है।
क्लास-सी आग (CLASS ‘C’ FIRE )
गैस अथवा द्रवित गैस में लगने वाली आग क्लास-सी आग कहलाती है। इस तरह की आग बुझाने के लिए बहुत अधिक सावधानी की आवश्यकता होती है। इसमें विस्फोट होने तथा एकाकए आग फैलने का खतरा रहता है। यदि सिलेण्डर में आग लग जाएं तो ऑक्सीजन के प्रदेय को बंद कर दें। सुरक्षित विधि है एलार्म बजाना तथा आग को बुझाना प्रशिक्षित लोगों पर छोड़ दें। सूखे चर्ण वाले अग्निशामक यंत्र का उपयोग इस प्रकार की आग पर करना चाहिए।
क्लास-डी आग (CLASS ‘D’ FIRE)
धातु तथा विद्युत उपकरणों में लगने वाली आग क्लास-डी आग कहलाती है। विशेष चूर्ण का विकास हो चुका है जो इस प्रकार की आग को बुझाने का तथा या नियंत्रित कर सकते हैं । इलेक्ट्रीकल उपकरणों में आग को हेलॉन, कार्बन डाईआक्साइड, CTC अग्निशामक यंत्र बुझाने में सहायक है। फोम या पानी से भरे अग्निशामक को किसी भी परिस्थिति में इलेक्ट्रानिक उपकरणों में प्रयुक्त नहीं किया जाता है।
अग्निशामक के प्रकार (Types of Fire Extinguisher)
विभिन्न प्रकार की आग से निपटने के लिए विभिन्न तरह के अग्निशामक यंत्र उपयोग किय जाते है। जिसे इस सरणी से समझते है –
| आग का प्रकार | ईंधन का प्रकार | अग्निशामक यंत्र |
|---|---|---|
| क्लास-ए | लकड़ी, कागज, कपडा | पानी से भरे अग्निशामक |
| क्लास-बी ग्रीस | गैसोलीन, तेल | झाग वाले अग्निशामक |
| क्लास-सी | गैस अथवा द्रवित गैस | सूखा पाउडर अग्निशामक |
| क्लास-डी | धातु तथा विद्युत उपकरण | हेलॉन अग्निशामक यंत्र |
